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डार्क सर्कल भी गहरी कहानी कहते हैं।

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 आँखों के नीचे बने डार्क सर्कल भी एक कहानी बयां करते हैं। उस सपने को परिभाषित करते हैं, जिसे एक निम्नवर्गीय परिवार का कोई भी लड़का आज के परिवेश में देखना तो दूर, सोचने का भी साहस नहीं कर सकता। जी हाँ!  मैं बात कर रहा हूँ एक ऐसे दुस्साहस की जिसे पढ़ाई कहते हैं। जब मैं दसवीं क्लास में था मुझे बताया गया दसवीं पास करना बहुत कठिन है। और फर्स्ट डिवीजन का तो सोचना भी असंभव है। मेरे मन में एक सवाल आया- ऐसा क्या है यार इस परीक्षा में? यह सवाल मुझे साल भर कभी न भूला। विद्यालय में जो पढ़ाया जाता रहा, उसी को पढ़ता रहा। लेकिन मन में यह भी सोचता रहा कि अगर यही सब परीक्षा में आना है; तो परीक्षा इतनी कठिन कैसे होगी? दिन बीते और परीक्षा का समय भी आया। प्रश्न सामान्य थे और उत्तर देने का ढंग भी लगभग वैसा ही था। लेकिन रिजल्ट आने पर पता चला कि मैंने बहुत बड़ा तीर मार लिया है। लोगों को भरोसा ही नहीं हुआ कि यह कैसे हो गया? और भरोसा हो भी क्यों? 3 बजे रात से उठकर अंग्रेजी के पैराग्राफ रटने का रूटीन मैंने बनाया था, लोगों ने नहीं ? गणित के चार- चार पन्ने के सवालों को चालीस-चालीस बार लिखने की आदत मैंने ...

बाबर को गले लगाना विराट को पड़ा महँगा!

बीसीसीआई ने एक दिवसीय क्रिकेट की कप्तानी से विराट को हटाया, रोहित शर्मा को बनाया नया कप्तान। नई दिल्ली:- भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टेस्ट और एकदिवसीय टीम की घोषणा कर दी है। टेस्ट की कप्तानी विराट कोहली के हाथों सलामत है। लेकिन एक दिवसीय मैचों की कप्तानी उनसे छीन ली गई है। उनकी जगह रोहित शर्मा को एकदिवसीय मैचों का नया कप्तान बनाया गया है। एकदिवसीय क्रिकेट में बतौर कप्तान विराट कोहली ने 70 की औसत से जीत दर्ज की है। उनकी असफलता का एकमात्र पैमाना विश्वकप की हार को बनाया जा रहा है। साथ में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यह दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज बाबर आजम को गले लगाने का दुष्परिणाम है। वहीं सोशल मीडिया में रोहित शर्मा की काबिलियत के बजाए उनके 'शर्मा' होने के कारण कप्तानी मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। रोहित और विराट फैंस क्लब के बीच गहमागहमी तेज हो गई है। विभिन्न पहलुओं से एक दूसरे की तुलना की जा रही है। इन सब को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि इतने शानदार प्रदर्शन और विराट आंकड़ों के बावजूद कोहली को कप्तानी से क्यों हटाया गया? या फिर अब यह...

विचार

 इस हाइड्रोजन जैसी जिंदगी को हीलियम बनाने की जद्दोजहद में ही आधी उम्र गुजर जाएगी और हमारी सारी चाहतें धरी की धरी रह जाएंगी। हीलियम बनने के बाद भी हमें किसी न किसी से बंध बनाना ही होगा। बिना बंधन के कोई भी पूर्ण नहीं है। हम संतृप्त होकर भी संतुष्ट नहीं हो सकते। मानवीय प्रवृत्ति एकदम विज्ञान जैसी है। मेंडलीफ की आवर्त सारणी का हर सदस्य अपना अष्टक पूर्ण करने की जद्दोजहद में लगा रहता है। यहाँ तक कि जीरो समूह के तत्व भी स्थाई होने के बावजूद अपूर्ण हैं। हाइड्रोजन से हीलियम तक आने का एक लंबा सफर है। बीच में आराम भी किया जा सकता है। लेकिन आराम अस्थाई है क्योंकि हम भविष्य दृष्टा हैं। वर्तमान में जीने की आदत नहीं है। अतीत में किए गए काम ओछे लगते हैं। अपने वर्तमान का अधिकतम समय अतीत के पश्चाताप और भविष्य की चिंता में जाया कर देते हैं। परिणाम यह होता है कि हम कहीं के नहीं रहते। फिर कोई शायर आकर कह देता है "हम दीवानों का पता पूछना, तो पूछना यूँ, जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ रहते हैं," और हम तालियाँ बजा देते हैं। हम सोच ही नहीं पाते कि हमें रहना कहाँ है। निराशा के समय अतीत में, चिंता के समय...

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्यसेवा मुख्य परीक्षा की तिथियां घोषित कीं...

 भोपाल:- मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने साल 2021 की राज्य सेवा परीक्षा के दिनांक बुधवार को जारी कर दिए हैं। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए गए अकादमिक कैलेंडर में 2021 की राज्य सेवा परीक्षा का विज्ञापन इसी साल दिसंबर में आने की बात कही गई है। 24 अप्रैल 2022 को प्रारंभिक परीक्षा होगी, मई तक परिणाम जारी होंगे, अगस्त में मुख्य परीक्षा कराई जाएगी, जिसके परिणाम अक्टूबर में दिए जाएंगे, नवंबर में साक्षात्कार होगा और अंतिम चयन परिणाम साल 2022 के दिसंबर महीने में दे दिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि अभी 2019 के साक्षात्कार और 2020 की मुख्य परीक्षा लेनी बाकी है। अकादमिक कैलेंडर में इनकी भी तिथियाँँ जारी कर दी गई हैं।  2019 की मुख्य परीक्षा के परिणाम दिसंबर 2021 में घोषित किए जाएंगे। फरवरी 2022 तक साक्षात्कार लेने की बात कहीं गई है। मार्च 2022 तक अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इसी प्रकार 2020 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम दिसंबर 2021 में जारी किए जाएंगे। जबकि अप्रैल 2022 तक मुख्य परीक्षा कराई जाएगी, जिसके परिणाम जुलाई 2022 में आएंगे। सितंबर में साक्षात्कार होगा और अक्टूबर 20...

इतनी भी क्या जल्दी थी बल्लू!

बल्लू! कितने सपने संजोए थे तेरे लिए। भैया ने, भाभी ने, दोनों दीदियों ने, मम्मी ने, पापा ने, मैंने। बर्तन, अलमारी, कूलर, पंखे सारे साज-ओ- सामान इकट्ठे कर लिए गए थे तेरे ब्याह के लिए। सब की कामना थी तेरे हाथों में मेहंदी लगते देखने की। सोचा था पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ा काम कर लूंगा तो कुछ और तो नहीं पर अपनी कमाई से 5 थान बर्तन और 1 जोड़ी साड़ी तो दे सकूंगा। भैया दुनिया की सारी सुख- सुविधाएं, खाना- पीना भूलकर लकड़ी की कंपनी में 20- 20 घंटे सिर्फ इसलिए काम करते रहे कि बेटी का ब्याह अच्छे से हो जाए। मम्मी पापा के मन में एक अपार खुशी थी की नातिन का ब्याह देख लें। उनकी इच्छा भी पूरी न हो सकी। पापा हमेशा कहते थे कि नातिन का ब्याह धूमधाम से करूंगा, भले ही कितने भी पैसे लग जाएँँ। पापा की इस इच्छा को भैया ने अपना सबकुछ मान लिया था, और काम करते-करते नर कंकाल हो गए थे। अंततः व्यवस्था हो गई थी। पर किसे पता था कि अकारण ही पेट में दर्द उठेगा और तू हम सब को छोड़ कर काल के गाल में समा जाएगी।  बल्लू! तुझे आखरी बार मैंने तब देखा था जब तू 10 साल की थी। तेरा बाल रूप और फोन में सुनी हुई तेरी आवाज ही मुझे याद...

मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त और वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी राष्ट्रीय शरद जोशी पुरस्कार से होंगे सम्मानित.....

  भोपालः मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने 2019 और 2020 के प्रतिष्ठित सम्मानों की घोषणा कर दी है। साल 2020 का राष्ट्रीय शरद जोशी पुरस्कार मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त और वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी को प्रदान किया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग यह पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी व्यंग, ललित निबंध, संस्मरण, रिपोर्ताज, डायरी, पत्र इत्यादि विधाओं में उत्कृष्ट रचनात्मक लेखन के लिए प्रदान करता है। पुरस्कार के रूप में दो लाख रूपये की राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य ऐसे लेखकों को सम्मानित करना है जो उपन्यास, कहानी, नाटक आदि मुख्य विधाओं से इतर सृजनात्मक कार्य करते हैं।           श्री तिवारी ने पत्र-पत्रिकाओं में लिखने के साथ ही कई किताबों की भी रचना की है। उन्होंने अपनी पहली किताब 'हरसूद 30 जून' 2005 में लिखी थी। उसके बाद किताब लिखने का सिलसिला निरंतर चलता रहा। उन्होंने 'प्रिय पाकिस्तान', 'एक साध्वी की सत्ता कथा,' 'राहुल बारपुते' 'भारत की खोज में मेरे 5 साल' आदि किताबें लिखीं हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब 'आध...